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मोड़ दुकानदार है चलते आगे कर्म ज्ञान जिंदगी चलते फिरते जाना सर लहरों को बुराई समाज रिश्ते हिंदी कविता गालिब इश्क़ लड़ते देखा है

Hindi चलते चलते Poems